मानव जीवन में बुजुर्गों को वट वृक्ष के समान माना गया है

 


पंडित अशोक चौबे शिक्षा के अभाव में युवा माता-पिता और बुजुर्गों को वृद्ध आश्रम मैं छोड़ देते हैं मंडीदीप माता-पिता और बुजुर्गों को बट वृक्ष के समान माना जाता है जिस घर में बुजुर्ग हैं उस घर में संकटों का शीघ्र निराकरण होता है परंतु आज युवा पीढ़ी शिक्षा के अभाव में उनको वृद्ध आश्रम की ओर दर-दर की ठोकरें खाने पर छोड़ देती है निजी स्वार्थों के चक्कर में उनका तिरस्कार करती है यही कारण है कि वह जीवन भर सुखी नहीं रहते जैसी कर्मी वैसी भरनी की तर्ज पर उनको इसी युग में जैसे कर्म करें हैं वैसा फल प्राप्त होता है यह बात रविवार को पटेल नगर के सरस्वती मंदिर आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत महापुराण कथा के तीसरे दिन खातेगांव से पधारे कथावाचक पंडित अशोक चौबे ने कही साथ ही बताया कि जिस घर में मां बाप को भगवान समझा जाता है वह घर स्वर्ग बन जाता है ईश्वर की सदैव उस घर पर कृपा होती है माता-पिता और बुजुर्गों को भगवान से बढ़कर माना गया है साथ ही वाराहा अवतार. हिरण्यकश्यप. समुद्र मंथन एवं नरसिंह अवतार की कथा का श्रवण कराया गया इस मौके पर सैकड़ों श्रद्धालुओं ने कथा का रसपान किया कथा का आयोजन 18 से 25 फरवरी तक प्रतिदिन दोपहर 2:00 से 5:00 तक आयोजित किया जा रहा है

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